लोग जिक्र करते है तेरा मेरी गजलो में

लोग जिक्र करते है तेरा मेरी गजलो में
मेरा ख्याल ही नही अता तुजे तेरे ख्यालो में

एक हुजूम खड़ी है मेरे पीछे गुलाबो की तरह
एक तू ही नजर नही आता उन कतारों में

पूछते है लोग मुजसे तुम्हारे अपने बारे में
जिक्र करता नही हु जो सोचे बुरा तुम्हारे बारे में

मोहब्बत भी क्या की मेने समन्दर की गहराइ से
जो पिता नही खुद और बहता रहा तन्हाई में

वीरान पड़े है मेरे गुलशन के अरमां
जो सवरता नही तेरी यादो में

राह बनकर चले आओ अभी सांस बाकी है
जो दफ़न नही होगा तेरे इंतिज़ार में

-जुबेर सिराज

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