दोनों जहाँ तेरी मोहब्बत में हार के

दोनों   जहाँ   तेरी   मोहब्बत   में     हार    के
वह  जा  रहा  है   कोई   शबे-ग़म   गुज़ार  के

विराँ  है  मयकदा  ख़म-ओ-सागर  उदास  हैं
तुम   क्या  गए  के  रूठ  गए  दिन  बहार  के

एक फुर्सत-ए-गुनाह मिली वह भी चार दिन
देखे    हैं   हमने   हौसले    परवरदिगार   .
Read More.