सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

सितारों   से   आगे   जहाँ   और   भी   हैं
अभी  इश्क़  मे   इम्तिहाँ   और    भी  हैं

तही  ज़िंदगी  से    नहीं    यह     फ़ज़ायें
यहाँ    सेकड़ों    कारवाँ   और     भी    है

कनाअत न कर आलम-ए-रंग-ओ बू पर
चमन   और भी  आशियाँ  और  भी   हैं

तू  शाहीं  है,   परवाज़   है    काम    तेरा
तेरे   सामने    आसमाँ    और    भी    है

इसी रोज़-ओ-शब में उलझ कर न रहा जा
कि   तेरे   जमान-ओ-मकाँ    और  भी  है

गए  दिन  कि  तन्हा  था मैं अंजुमन में
यहाँ  अब  मेरा  राज़दाँ  और  भी  है

~अल्लामा इकबाल(रह.)

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