Phoolon Ki Rakhiyali Wo Kya Jane

फूलो की रखियाली वो क्या जाने एक माली की तरह
जो चमन  को  खुद  सजाता  है  एक  खुशबु की तरह
अंधे हो गये  दोलतमंद   दोलते – शोहरत के नशे में
जिस के  घर  बंजर  बन  गये  एक  ख़ाक  की  तरह

Phoolon Ki Rakhiyali Wo Kya Jane Ek Mali Ki Tarah
Jo Chaman Ko.
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Phoolon Ki Rakhiyaali

Kisi Ka Ghar Ujad Kar

किसी का घर उजाड़ कर क्या मिला तुझे जुबेर
उन परिंदों से पूछ जिनका घोंसला हवा ले गयी

Kisika Ghar Ujaad  Kar Kyaa  Mila  Tujhe  Zuber
Un Parindo Se Puch Jinka Ghosla Hawa Le Gayi

~Zuber Siraj

किसी का घर उजाड़ कर